DWF के आह्वान पर मदद की धीमी रफ्तार, 40 लोगों ने बढ़ाए हाथ

दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन (DWF) के आह्वान पर कई लोगों ने हाथ बढ़ाया, अब तक जो जानकारी प्राप्त हो पाई, उसके अनुसार 19-30 सितंबर, 2019 मुहिम के बीच कुल 41 लोगों ने मदद की है। 41 में से 9 लोगों ने सीधे विरेंद्र बरनवाल जी के खाते में पैसे जमा कराए हैं जबकि 32 लोगों ने DWF के बैंक खाते और पेटीएम नंबर के जरिए अब तक बीस हजार रुपए की मदद की है। जानकारी यह भी है कि इलाज के लिए विरेन्द्र जी ने जो संस्थागत रूप से ब्याज पर कर्ज उठाया, पालघर के बरनवाल बंधुओं और मुंबई के बरनवाल समाज के सहयोग से उस कर्ज का भुगतान करने का प्रयास हो रहा है।

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टॉप 40 आईएएस में बरनवाल समाज के दो अधिकारी

दीपक राजा

बरनवाल समाज के लिए एक गौरव का क्षण है। समाज के दो लाल अपनी कार्यशैली और व्यवहार के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर टॉप 40 में स्थान बना पाने में सफल हुए। एक सर्वे के अनुसार, 1991 बैच के आईएएस अशोक बरनवाल को 26 वां स्थान मिला है जबकि 1996 बैच के आईएएस सुनील बरनवाल को 36 वां स्थान मिला है। बता दें कि श्री अशोक बरनवाल इस समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के मुख्य सचिव हैं जबकि डॉ. सुनील बरनवाल झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के सचिव हैं। एक बात और बताते चलें कि सुनील कुमार बरनवाल अपने बैच में यूपीएससी के टॉपर (रैंक 1) रहे हैं।

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GST एवं IT समिति के संयोजक बने आलोक गुप्ता

अखिल भारतीय संस्था फेडरेशन ऑफ पेपर ट्रेडर्स के वार्षिक अधिवेशन में फेडरेशन की कार्यकारिणी का चुनाव हुआ। जिसमें नोएडा इंटरपेन्योर्स एसोसिएशन (एनईए) के सचिव आलोक गुप्ता को फेडरेशन की कार्यकारिणी में निर्वाचित हुए। बता दें कि फेडरेशन का वार्षिक अधिवेशन और चुनाव होटल लीला एंबिएंस दिल्ली में संपन्न हुआ।

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बटुआ खोलें, कैंसर पीड़ित विरेंद्र को चाहिए समाज का सहारा

गाजीपुर (यूपी) के सैदपुर क्षेत्र के निवासी श्री विरेंद्र बरनवाल मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। वर्तमान में वह महाराष्ट्र के पालघर जिले में रहते हैं। टाटा अस्पताल, मुंबई में उनका उपचार चल रहा है। कैंसर के इलाज में विरेन्द्र का परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, उन्हें समाज से मदद की दरकार है। बीमारी के इलाज को एक सामूहिक यज्ञ मानते हुए कुछ मदद करने के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं। विरेंद्र के परिवार को देश और समाज से उम्मीद है कि उन्हें सब थोड़ी – थोड़ी मदद करें।

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लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का तरीका है निर्वाचन – दीपक राजा

  • गुप्त मतदान से होगा बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली की नई कार्यकारिणी का चुनाव
  • नई कार्यकारिणी के लिए बनाए गए तीन चुनाव अधिकारी
  • श्री राजेन्द्र लाल, अधिवक्ता संदीप गुप्ता और अधिवक्ता रणधीर गुप्ता को मिला चुनाव कराने की जिम्मेदारी

दिल्ली बरनवाल समाज की प्रतिनिधि संस्था वैश्य सभा की पहली विशेष आम सभा की बैठक 4 अगस्त, 2019 को हुई। ये विशेष बैठक आईटीओ मेट्रो स्टेशन के पास जवाहर लाल नेहरू युवा केंद्र, दिल्ली के नारायण दत्त तिवारी भवन में हुई। सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत बरनवाल वैश्य सभा को बेहतर रूप से संचालित करने के लिए संस्था के संविधान में कुछ संशोधन किया गया।

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दिल्ली बरनवाल समाज का तीसरा युवक-युवती परिचय सम्मेलन संपन्न

बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के तत्वावधान में तीसरा युवक-युवती परिचय सम्मेलन संपन्न हुआ। यह सम्मेलन जवाहर लाल नेहरू युवा केंद्र, दिल्ली के नारायण दत्त तिवारी भवन के चौथी मंजिल पर आयोजित हुआ। बरनवाल समाज के युवा सदस्यों को उन्हें जीवन साथी की तलाश को पूरी करने के लिए लगातार तीसरे वर्ष सभा ने इस सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में आने वाले 30 से अधिक युवक और युवतियों ने अपना-अपना परिचय दिया जबकि लगभग इतनी ही संख्या में युवक-युवतियों का बायो डाटा पढ़ा गया। इन सभी लोगों का डाटा आए हुए युवक-युवतियों के बीच शेयर किया गया। इसी माह आने वाले बरन पुंज अंक में सभी युवक-युवतियों का बायोडाटा का संक्षिप्त विवरण प्रकाशित किया जाएगा।

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बिकी हुई एक कलम


दामिनी

बिकी हुई कलम के दाम बहुत होते हैं
पर बिकी हुई कलम के काम भी बहुत होते हैं
बिकी हुई कलम को कीचड़ को कमल कहना पड़ता है
बिकी हुई कलम को क़ातिल को सनम कहना पड़ता है
बिकी हुई कलम को मौक़े पर ख़ामोश रहना होता है
और बेमौक़े ‘सरकार की जय’ कहना होता है
बिकी हुई कलम एक खूंटे से बंधी होती है
बिकी हुई कलम की सियाही जमी होती है
बिकी हुई कलम रोती नहीं, सिर्फ़ गाती है
बिकी हुई कलम से सच की आवाज़ नहीं आती है
बिकी हुई कलम शाहों के तख़्त नहीं हिला पाती है
बिकी हुई कलम सिर्फ़ चरण-पादुका बन जाती है
बिकी हुई कलम से आंधियां नहीं उठती हैं
बिकी हुई कलम से सिर्फ़ लार टपकती है
बिकी हुई कलम एक वेश्या होती है
जो अनचाहे जिस्मों को हंसके अपने जिस्म पे सहती है
बिकी हुई कलम की कोख बंजर होती है
बिकी हुई कलम अपनों ही की पीठ में घुसाया हुआ ख़ंजर होती है
बिकी हुई कलम से लिखा इतिहास सिर्फ़ कालिख पुता कागज़-भर होता है
बिकी हुई कलम का कांधा सिर्फ़ अपने शब्दों का जनाज़ा ढोता है
बिकी हुई कलम और जो चाहे बन जाती है
पर बिकी हुई कलम, कलम का हद अदा नहीं कर पाती है,
बिकी हुई कलम सिर्फ़ कलम नहीं रह पाती है…