मां

ममता की तू है रे मूरत
ईश्वर के अवतार समान।
हे जननी तुम्हें है प्रणाम
मात कहे जिसे हर संतान।।

किस मिट्टी का बना तेरा दिल,
औलाद के लिए जो घबराये।
फूलों सा तेरा दिल है नाजुक,
संतान के लिए फट जाए।।

चाहे कोई कितना बड़ा हो जाये,
करो अपनी मां का सम्मान।
जिसके बल पे ये जीवन है पाया ,
करो न कभी उनका अपमान।।

जी करता है बच्चा ही रहूं,
मां के गोद मे ही सोऊं।
जिसने मुझे प्यार से पाला है,
उसके मैं नित्य चरण धोऊं।।

– आर्यन बरनवाल
कक्षा – 8, दून पब्लिक स्कूल, धनबाद, झारखंड

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