बिहार आपको पुकार रहा है …

इन दिनों बिहार बाढ़ की विभीषका से जूझ रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति बहुत ही दर्दनाक स्थिति में है। पानी हाहाकार मचा रहा है। वहां रहने वाले लोगों की हालत बहुत खराब स्थिति में है। वहां रहने वाले लोगों को हर तरह से मदद की दरकार है। सरकार और उनका सरकारी अमला अपने गुणा गणित से काम कर रहा है लेकिन एक इंसान होने के नाते, भारत का नागरिक होने के नाते, हिन्दी भाषाई क्षेत्र का होने के नाते ही नहीं बिहारी होने के नाते भी स्वयं की प्रेरणा से हमें ऐसे मौके पर विषम परिस्थिति में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करनी चाहिए।

मदद के नाम पर खाद्य सामग्री दे सकते हैं, घरेलू सामान दे सकते हैं, पुराने और नए कपड़े दे सकते हैं, बेबी फूड्स दे सकते हैं। आप ये समझिए कि एक व्यक्ति, एक परिवार, एक बच्चे को जिंदा रहने के लिए जिन आवश्यक आधारभूत चीजों की जरूरत है, वो कुछ भी हो सकता है। आपकी एक छोटी सी मदद उनके लिए जीवन का आधार बन सकता है।

हमारे कुछ मित्र हैं जो मुजफ्फरपुर में वॉयस ऑफ बिहार के नाम से ग्रुप बनाकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर मदद कर रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप में बाढ़ पीड़ितों तक नहीं जा नहीं पा रहा हूं लेकिन मेरा प्रयास उन तक पहुंचे। इस प्रेरणा से यह पोस्ट लिख पा रहा हूं। आपकी एक छोटी मदद, बाढ़ पीडितों के चेहरे पर मुस्कान ला देगा, उन्हें सम्मानित रूप से फिर से जीने का अधिकार देगा।

वॉयस ऑफ बिहार से जुड़े कुछ मित्र दिल्ली में भी हैं। वे लोग दिल्ली में भी कलेक्शन सेंटर बनाए हुए हैं। मैंने अभी एक दिन पहले अपने पुराने कपड़ों से भरा एक बैग देकर आया हूं। मैंने छोटी भूमिका अदा की है लेकिन इस छोटी भूमिका निबाहने में जो आनंद मैं महसूस कर रहा हूं। मैं चाहता हूं वो आनंद इस पोस्ट को पढ़ने वाला हर व्यक्ति महसूस करे और स्वेच्छा से जो जहां है, जिससे जितना बन रहा है, वो करे। बाढ़ विभीषका से प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए रामसेतु बना रहे वॉयस ऑफ बिहार के साथियों को दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से गिलहरी की भांति एक छोटी भूमिका निर्वहन कर रहा हूं।

सोशल साइट्स के जरिए, समाचार माध्यमों के जरिए हमें निरंतर बाढ़ की विभीषिका और वहां की स्थिति की जानकारी मिल रही है। उसे हम केवल देख रहे हैं, सिर्फ एक समाचार की तरह। उसे विभीषिका को महसूस कीजिए और प्रेरित हों मदद करने के लिए।

बिहार आपको पुकार रहा है …

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