कैंसर पीड़ित उमेश मोदी को बचा नहीं पाए, उनके बच्चों को शिक्षित करने के लिए मदद की अपील

चकाई, जमुई के रहने वाले श्री उमेश मोदी को कैंसर था। तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका परिवार सदमें हैं। उमेश जी के नहीं रहने पर उनके बच्चों की जिम्मेदारी समाज पर है। उनके मदद के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। गौरतलब है कि श्री उमेश मोदी जी बरनवाल समिति चकाई की ओर से मिले 20 हजार रुपए की सामूहिक मदद से इलाज कराने पटना आए थे। इसकी जानकारी दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन को 7 सितंबर, 2018 को हुई। कई जगहों पर फोन और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खोजबीन के बाद श्री उमेश मोदी के भतीजे संदीप का नंबर उपलब्ध हो पाया। उसके बाद हमारे मित्रमंडली में शामिल और पटना में समाज की बेहतरी के लिए कार्यशील बरनवाल सृजन फाउंडेशन टीम में शामिल दीपक बरनवाल, लीलाधर उर्फ गुड्डू बरनवाल जी तक दीपारती फाउंडेशन ने बात पहुंचाई और यथासंभव आर्थिक रूप से मदद करने का भरोसा दिया था। 

दीपारती फाउंडेशन की सूचना पर बरनवाल सृजन फाउंडेशन के अध्यक्ष लीलाधर बरनवाल और उनकी टीम तत्काल 8 सितंबर को मौके पहुंचे। महावीर कैंसर संस्थान में पीड़ित श्री उमेश मोदी और उनके भतीजे से मिले और उनका हौसला बढ़ाया। वहां के डॉक्टरों से बातचीत की। हालांकि उनकी बीमारी का स्टेज इतना आगे हो गया था कि डॉक्टर अपने इलाज से ज्यादा ईश्वरीय चमत्कार पर विश्वास कर रहे थे। अंतत: चार महीने के उपचार के दौरान 5 दिसंबर, 2018 को बरनवाल सृजन फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष दीपक बरनवाल जी के माध्यम से सूचना मिली कि उमेश मोदी का देहांत हो गया।

हमारी जिम्मेदारी

अब जब उमेश मोदी दुनिया में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में, हम केवल उन्हें श्रद्धांजलि देकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को तिलांजलि नहीं दे सकते हैं। उनके जाने के बाद महरूम उनके दोनों बच्चों की परवरिश और बेसिक शिक्षा की जिम्मेदारी रिश्तेदार और समाज पर है। हम सबका दायित्व  है कि उनके दो बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए कुछ व्यवस्था अपनी तरफ से करें। राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से जो मदद मिल सकती है, उसे भी दिलाने का प्रयास करें।

स्वर्गीय उमेश के बाद दोनों बच्चों का क्या?

शिक्षा कोई एक दिन का काम नहीं है। ये सतत चलने वाली प्रक्रिया है। हमें एक ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि उनके दोनों बच्चों को एक-एक हजार रुपए मासिक मिलता रहे, जब तक दोनों बच्चे स्कूल में पढ़ाई करते हैं। मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी होने तक यही व्यवस्था लागू रहे। जब स्वर्गीय उमेश मोदी के बच्चे मैट्रिक पास कर लेंगे, उसके बाद आगे की पढ़ाई कैसे करनी है या उन्हें कैसे करियर का चुनाव करना है, तब के अनुसार मदद की सोचेंगे।

ऐसे उपलब्ध करा सकते हैं निरंतर मदद

दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन के पास एक आइडिया है। फाउंडेशन समाज से 24 ऐसे लोगों की तलाश है जो स्वर्गीय उमेश मोदी के दोनों बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए की मदद करना चाहते हो। अगर ये तलाश पूरी हुई तो इन पैसों का एक फंड बना दिया जाएगा। इससे मिलने वाले ब्याज के साथ दीपारती फाउंडेशन कुछ रकम जोड़कर दोनों बच्चे को हर महीने पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता करते रहेंगे। बेसिक शिक्षा पूरी करने बाद ये बच्चे अगर व्यवसाय करना चाहेंगे तो भविष्य में उन्हें कुछ शर्तों के साथ प्रारंभिक पूंजीगत रकम की मदद भी दी जाएगी।

जो रकम इसके लिए देंगे उन्हें क्या मिलेगा?

जो लोग 11-11 हजार रुपए का दान इस काम के लिए देंगे। उन लोगों की एक समिति बनाएंगे। समिति समय-समय पर दोनों बच्चों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की समीक्षा कर सकती है, फाउंडेशन को परामर्श देकर उसमें बदलाव भी करा सकती है। भविष्य में फाउंडेशन शिक्षा के क्षेत्र नए कदम के लिए समय-समय पर समिति से सुझाव भी मांगेगी।

अगर आप हमें आर्थिक रूप से मदद करना चाहते हैं तो जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। 

5 thoughts on “कैंसर पीड़ित उमेश मोदी को बचा नहीं पाए, उनके बच्चों को शिक्षित करने के लिए मदद की अपील”

    1. आपका स्वागत है सर … आपको मेल पर डिटेल्स भेज दी गई है …

      विनम्रता के साथ धन्यवाद

    1. आपका स्वागत है सर … आपको मेल पर डिटेल्स भेज दी गई है …

      विनम्रता के साथ धन्यवाद

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