पांच लाख की आवश्यकता, समाज से अब तक मिला मात्र 80 हजार

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए श्री मनोज कुमार बरनवाल जी पारस अस्पताल पटना में 31अगस्त को भर्ती होंगे, 3 सितंबर को किडनी ट्रांसप्लांट होगा। उनकी पत्नी उन्हें किडनी दे रही है। कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बिहार सरकार 3 लाख रुपए की आर्थिक मदद कर रही है। श्री मनोज जी पिछले पांच साल से डायलिसिस पर हैं। उनकी आर्थिक हालात ठीक नहीं है। श्री मनोज जी के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक देखें Continue reading “पांच लाख की आवश्यकता, समाज से अब तक मिला मात्र 80 हजार”

किडनी ट्रांसप्लांट कराने में आर्थिक सहयोग दें, ऑपरेशन 25 अगस्त को पटना में

पांच साल से डॉयलिसिस पर रहने वाले श्री मनोज कुमार बरनवाल को किडनी डोनर मिल गया है लेकिन उन्हें 4 लाख रुपए आर्थिक मदद की दरकार है। उनकी पत्नी रीता बरनवाल अपना एक किडनी मनोज को देंगी। किडनी ट्रांसप्लांट कराने की कागजी कार्रवाई भी पूरी हो चुकी है। बिहार सरकार 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए किडनी ट्रांसप्लांट की मंजूरी दे दी है। इसी महीने 25 अगस्त को पटना के पारस अस्पताल में श्री मनोज का किडनी ट्रांसप्लांट होना है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इसमें ऑपरेशन कराने और फिर ऑपरेशन के बाद लगभग तीन महीने तक इलाज अस्पताल की देख-रेख में होगा।

पारस अस्पताल ने किडनी ट्रांसप्लांट से लेकर आगे के खर्च का आकलन करीब 10 लाख रुपए लगाया है। इलाज का खर्च बढ़ भी सकता है। श्री मनोज जी को भरोसा है घर और रिश्तेदारी से वह दो लाख रुपए तक प्रबंध कर लेंगे। सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू करने का परिणाम है कि मनोज जी के खाते में अब तक एक लाख रुपए की मदद पहुंच पाई है। फिर भी, कम से कम चार लाख रुपए की और आवश्यकता है। इस सूचना को पढ़ने वाले सभी शुभचिंतकों, मित्रों और समाज का भला चाहने वाले लोगों से अनुरोध है कि मनोज को मदद करने में सहभागी बनें। Continue reading “किडनी ट्रांसप्लांट कराने में आर्थिक सहयोग दें, ऑपरेशन 25 अगस्त को पटना में”

इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन

दिल्ली के कटवरियासराय स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के सभागार में 11 अगस्त, 2018 को श्री मुकेश बरनवाल द्वारा भारतीय इतिहास पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन का हुआ। पुस्तकों का नाम ‘पाषाण काल से आजादी तक’ और ‘भारत का राष्ट्रीय आंदोलन’ है। दो पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम संवर्धन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हुआ। पुस्तकों का विमोचन दिल्ली विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों से आए प्रोफेसर और विद्वजनों के हाथों संपन्न हुआ।  Continue reading “इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन”

किडनी ट्रांसप्लांट के इलाज में श्री मनोज बर्णवाल को 5 लाख रुपए आर्थिक मदद की दरकार

श्री मनोज कुमार बर्णवाल पांच साल से डॉयलिसिस पर हैं। पटना में इसी महीने के अंत तक किडनी ट्रांसप्लांट होना है। बिहार सरकार तीन लाख रुपए की मदद दे रही है। लगभग एक लाख रुपए की मदद दो-तीन लोगों ने दी है। घर-रिश्तेदारी से करीब दो लाख रुपए मनोज स्वयं जुटा रहे हैं। फिर भी लगभग 4-5 लाख रुपए की आवश्यकता है। इस सूचना को पढ़ने वाले सभी शुभचिंतकों, मित्रों और समाज का भला चाहने वाले लोगों से अनुरोध है कि मनोज को मदद करने में सहभागी बनें। Continue reading “किडनी ट्रांसप्लांट के इलाज में श्री मनोज बर्णवाल को 5 लाख रुपए आर्थिक मदद की दरकार”

समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो ‘बरन संवाद’ में भाग लीजिए, प्रस्तावित कार्यक्रम 16 सितंबर को

देश की तरक्की में अगर आप कुछ योगदान देना चाहते हैं। बरनवाल समाज की बेहतरी के लिए कुछ करना चाहते हैं। समाज को कैसा होना चाहिए, इसको लेकर कोई परिकल्पना आपके मन में है। इसको लेकर कोई विचार आपके मन में है। अपने विचार और सपने को वास्तविक रूप में साकार होते देखना चाहते हैं और उसका कोई रोडमैप आपने सोच रखा है तो यह सूचना आपके लिए है। आप अपने विचार और रोडमैप लिखकर 30 अगस्त, 2018 तक दिल्ली भेज दीजिए। Continue reading “समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो ‘बरन संवाद’ में भाग लीजिए, प्रस्तावित कार्यक्रम 16 सितंबर को”

गजल – अफसानों की उल्फत

जमीं पर पैर नहीं या पैरों तले जमीं नहीं।
वो आसमां में उड़े तो इसका ख्याल नहीं।।

टूटते दरख्तों की जानिब किया जो खबर।
उस बेखबर बेवफा को इसका मलाल नहीं।।

गुलजार है उनका अफसानों की उल्फत।
ऐसे में गुजारे उम्र होंगे ऐसे हलाल नहीं।।

लूटा दूंगा बज्म-ए-दिल शाम-ए-महफिल।
सहन कर सकते हैं बांके का जलाल नहीं।।

– दीपक राजा
15 जुलाई, 2018
नई दिल्ली

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भारत के पलकों पर उड़न परी 2 हिमा दास बनी गोल्डन गर्ल

ऐथलेटिक्स ट्रैक इवेंट में अंडर-20 में देश को पहली बार गोल्ड दिलाकर सुश्री हिमा दास ने इतिहास रच दिया। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में देश के लिए वह काम कर दिया जिसे मिल्खा सिंह नहीं कर पाए और न ही देश की पहली उड़न परी पीटी उषा नहीं कर पाई। धान के खेतों में दौड़ने वाली सुश्री हिमा दास की इस उपलब्धि तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। गांव, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए सुश्री हिमा दास की कहानी प्रेरणादायी है।  Continue reading “भारत के पलकों पर उड़न परी 2 हिमा दास बनी गोल्डन गर्ल”