वित्तीय फैसलों को लेकर लापरवाही से बचें

मोबाइल, टीवी, बाइक या फ्रीज आदि के बगैर तनिक भी रहने का विचार भी मन में लोग नहीं लाते हैं। ये सब अच्छे से चले, इसके लिए एक से एक प्लानिंग करते हैं लेकिन जब बात रिटायरमेंट की प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा अथवा शादी जैसे वित्तीय फैसलों की आती है तो लोग यहां लापरवाही का परिचय देते हैं। अक्सर इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं बना पाते हैं। या तो सब भगवान भरोसे छोड़ देते हैं या फिर बिना सोचे-समझे और पॉलिसी के गुण-दोषों की समीक्षा किए बगैर दोस्तों या रिश्तेदारों के कहने पर जल्दबाजी में कहीं भी बचत का एक हिस्सा निवेश कर देते हैं।

परिवार के सभी सदस्यों के नाम पर होनी चाहिए बीमा
हमें जीवन में एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि परिवार के सभी सदस्यों के नाम पर कुछ न कुछ बीमा होनी चाहिए लेकिन परिवार के किस सदस्य के लिए कौन सी बीमा होनी चाहिए और कितने की बीमा होनी चाहिए। इसकी समझ हमें बनानी चाहिए। हमें पारिवारिक हितों, जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बीमा पॉलिसी के माध्यम से मिलने वाले धन पर भी विचार करना चाहिए। केवल टैक्स को लेकर ही चिंता नहीं करनी चाहिए। सरकार तो लोगों को बीमा के प्रति जागरूकता लाने के लिए बीमा प्रीमियम और बीमा धन को आयकर अधिनियम के तहत छूट देती है। बीमा को लेकर किसी भी निर्णय पर पहुंचने के लिए आप चाहें तो Diparti Communication की टीम से सलाह ले सकते हैं, उनसे संपर्क कर सकते हैं। Diparti Communication की टीम बीमा मार्केटिंग को एक जनसेवा के भाव से काम करती है।

जीवन बीमा का मकसद तय करें
जीवन बीमा खरीदने का पहला कदम इसके उद्देश्य का निर्धारण करना है। यानी किस मकसद से आप इसे खरीदना चाहते हैं। जीवन बीमा आपके परिवार को आपकी अनुपस्थिति में वित्तीय छतरी प्रदान करता है। आपके बच्चे की शिक्षा व विवाह के लिए पैसों का इंतजाम करता है अथवा रिटायरमेंट के बाद खुद आपको आर्थिक मदद प्रदान करता है। लिहाजा पॉलिसी खरीदने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार, बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर या Diparti Communication की टीम से परामर्श कर ले सकते हैं। वे आपकी बचतों और आवश्यकताओं के अनुसार सर्वाधिक उपयुक्त पॉलिसी चुनने में आपकी मदद करेंगे। ऐसा करते वक्त हमेशा विस्तृत विश्लेषण व जोखिम आकलन पर जोर दें। इससे पॉलिसी के बारे में निर्णय लेने में आपको सहूलियत होगी। इतना ही नहीं, बीमा क्षेत्र में प्रचलित शब्दावली के अर्थ भी समझने में आसानी होगी। जैसे कि कैश वैल्यू, मेच्योरिटी अमाउंट, प्रीमियम, इक्विटी-डेट रेशियो तथा क्लेम अमाउंट। इससे पॉलिसी के कागजात को समझने में मदद मिलेगी।

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