मीडिया कामगारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए CAMP

कहीं भी अन्याय हो, किसी को भी कठिनाई हो, उसे उजागर करने से लेकर समाधान के लिए पहल करने तक में मीडिया की अहम भूमिका है। लेकिन यह मीडिया कामगारों के लिए त्रासदी है कि अपने लोगों के लिए प्रति मीडिया संवेदनाहीन और निष्ठुर है। इस त्रासदी को दूर करने के लिए हम में से ही किसी को आगे आना होगा और एक-दूसरे के सहयोग से पहल करनी होगी। इसकी शुरुआत करने के लिए सामाजिक संस्था दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन (DWF) एक योजना लेकर आपके सामने है। उस योजना का नाम है – कैंप (CAMP यानि Committee for Assistance to Media/ Multi-Tasking Persons)। आइए कैंप योजना को लसमझते हैं। योजना समझने के बाद इससे जुड़िए। अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए योजना को सफल बनाने में सहयोग करिए। कैंप योजना हमारे-आपके कठिन दौर में आशादीप बनकर आया है।

क्या है कैंप योजना

कैंप योजना में जुड़ने से पहले, इसे समझने की आवश्यकता है। दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन का मानना है कि पत्रकारिता के कामगारों के लिए आत्मनिर्भरता की अवधारणा और सामूहिक अंशदान के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, नौकरी जाने पर ब्याज मुक्त ऋण, आकस्मात् निधन की स्थिति में आश्रित परिजन को तत्काल आर्थिक सहायता दिया जा सके। इतना ही नहीं, कामगारों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सांस्कृतिक वातावरण के साथ अच्छी शिक्षा का प्रबंधन हो सके। इसके लिए कैंप की राष्ट्रीय समिति दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन के सानिध्य में काम करेगा।

कौन जुड़ सकता है योजना से

भारत के किसी भी राज्य में रहने वाले कोई भी व्यक्ति, जिनकी आयु 18 वर्ष से 45 वर्ष के बीच है, और वे पत्रकारिता के क्षेत्र में कामगार के रूप में चाहे वह किसी भी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं, कैंप की योजना से जुड़ सकते हैं। एक बार कैंप योजना में जुड़ जाने के बाद, नियमित रूप से सदस्यता का नवीनीकरण कराते रहने पर 70 वर्ष की आयु सीमा प्राप्त करने तक कैंप योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

कैंप योजना की विस्तृत जानकारी

कैंप योजना की अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं। यहां दो पीडीएफ फाइल (CAMP – Introduction & CAMP – Advantage) दिया गया है।

कृपया इन दोनों फाइलों को पढ़ें और इस योजना पर मनन करें। अच्छा लगे तो इससे जुड़ने पर विचार करें और संयोजन समिति के सदस्यों को वाट्सअप के माध्यम से अपना मंतव्य भेजें। एक बात हमेशा ध्यान में रखना है कि यह योजना सामूहिक रूप से न्यूनतम वार्षिक अंशदान के माध्यम से ही चलना है। परिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक सारोकार के बीच संघर्ष में जुझते व्यक्तित्व के सम्मान के लिए, व्यक्ति का सम्मानपूर्वक सहायता प्रदान करने का नाम है कैंप। कैंप यानि CAMP – Committee for Assistance to Media/ Multi-Tasking Persons. किन्हीं को कोई सुझाव या सलाह देना हो, अवश्य दें, खुले दिल से विचारों और सुझावों का स्वागत है। मेरी योजना में कोई बदलाव लाना चाहते हों तो सबके सुझाव का खुले दिल से स्वागत है। वास्तविकता के धरातल पर आप सबके सहयोग के बगैर CAMP संभव नहीं है। सुझाव के लिए हमें मेल करें – dipakkumarraja@gmail.com  मेल करते समय विषय वाले कॉलम CAMP अवश्य लिखें।

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