अगर आप रिश्तों के प्रति संजीदा हैं और रचनाएं करते हैं तो आप हो सकते हैं पुस्तक प्रकाशन योजना में शामिल

अगर आप खून के रिश्ते, पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक रिश्ते को लेकर संजीदा हैं और रिश्तों पर आधारित अपनी भावनाओं को शब्द में पिरोना जानते हैं तो यह खबर आपके लिए है। आप कविता, कहानी या किसी भी विधा में साहित्यिक रचना करते हैं तो यह खबर आपको पुस्तक का हिस्सा बनने का एक अवसर बनकर आया है। Diparti Welfare Foundation (DWF) आपके लिए पुस्तक प्रकाशन की योजना लेकर आया है। DWF की योजना में आप अपनी रचना भेजकर प्रकाशित होने वाली पुस्तक का हिस्सा बना सकते हैं।

पुस्तक प्रकाशन की योजना के तहत रचनाएं आमंत्रित
अखिल भारतीय स्तर पर काम करने की इच्छा रखने वाला संगठन – Diparti Welfare Foundation (DWF), पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को संजोना चाहता है। उन रिश्तों की भावनाओं और संवेदनाओं को एक आकार देना चाहता है। रिश्तों पर लिखी जा रही रचनाओं को एक सूत्र में पिरोना चाहता है। इसके लिए DWF पुस्तक प्रकाशन की योजना लेकर आपके बीच आया है।

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बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के महासचिव अधिवक्ता उमेश बर्णवाल बने युवा जदयू के मीडिया प्रभारी

बरनवाल समाज के कर्मठ कार्यकर्ता अधिवक्ता उमेश बर्णवाल को युवा जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार ने राष्ट्रीय सचिव सह मीडिया प्रभारी बनाया गया है। अधिवक्ता उमेश वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड दिल्ली इकाई के प्रदेश सचिव के रूप में योगदान दे रहे थे। उनके लगन और मेहनत को देखते हुए पार्टी ने उनका कद बढ़ाया है। Continue reading “बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के महासचिव अधिवक्ता उमेश बर्णवाल बने युवा जदयू के मीडिया प्रभारी”

डॉ. एन के बरनवाल सर्वसम्मति से दिल्ली के अध्यक्ष मनोनित, महासचिव बने अधिवक्ता उमेश बर्णवाल

बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के अध्यक्ष कैप्टन आरपी बरनवाल और महासचिव श्री मुन्नी लाल जी के इस्तीफे से उत्पन्न परिस्थिति में 20 मई, 2018 को बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। बैठक में एक-दो कार्यकारिणी के सदस्यों को छोड़कर पूरी कार्यकारिणी उपस्थित हुई। अध्यक्ष और महासचिव के इस्तीफे से उत्पन्न स्थिति को देखेते हुए शेष कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से सभा के वरिष्ठ सदस्य डॉ. नरेन्द्र कुमार बरनवाल को अध्यक्ष मनोनित किया गया। इसके साथ संगठन प्रभारी अधिवक्ता उमेश बर्णवाल को महासचिव मनोनित किया गया। Continue reading “डॉ. एन के बरनवाल सर्वसम्मति से दिल्ली के अध्यक्ष मनोनित, महासचिव बने अधिवक्ता उमेश बर्णवाल”

बरनवाल वैश्य सभा के अध्यक्ष कैप्टन साहब व महासचिव मुन्नी लाल जी का इस्तीफा मंजूर

फरीदाबाद में 25 दिसंबर, 2017 को आयोजित अहिबरण जयंती में भाग लेते कैप्टन रामजीवन प्रसाद बरनवाल। (फाइल फोटो)

बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली की परिकल्पना करने से लेकर 32 सालों से इसे सुचारू रूप से संचालन करने, समाज के बंधुओं को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करने वाले कैप्टन साहब और मुन्नी लाल जी ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

लंबे समय तक बरनवाल वैश्य सभा का नेतृत्व कर रहे कैप्टन रामजीवन प्रसाद बरनवाल जी ने अधिक उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बरनवाल वैश्य सभा की कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए इस्तीफा पत्र दिया। इस पत्र में उन्होंने पदमुक्त करने और नए लोगों को इसके लिए आगे आने का आह्वान किया। Continue reading “बरनवाल वैश्य सभा के अध्यक्ष कैप्टन साहब व महासचिव मुन्नी लाल जी का इस्तीफा मंजूर”

बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली के महासचिव बने मुन्नी लाल, विरेन्द्र को मिली कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी

वर्ष 2017-19 के लिए बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली की नई कार्यकारिणी गठन हो गया है। सभा के सक्रिय कार्यकर्ताओं की सर्व सहमति से प्रताप विहार, गाजियाबाद के रहने वाले श्री मुन्नी लाल जी को बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली का महासचिव बनाया गया है जबकि मंडावली, पूर्वी दिल्ली के श्री विरेन्द्र कुमार बरनवाल सभा का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। Continue reading “बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली के महासचिव बने मुन्नी लाल, विरेन्द्र को मिली कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी”

पार्षद पूनम बरनवाल की पहल पर गिरिडीह में महाराजा अहिबरण के नाम हुआ एक चौराहा

झारखंड के गिरिडीह शहर से एक सुखद समाचार मिला। यहां के एक चौराहे का नामकरण बरनवाल समाज के जातिपुरुष महाराजा अहिबरण के नाम पर हुआ। यह पूरे भारत वर्ष में रहने वाले बरनवाल समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण है, वह इसलिए कि Continue reading “पार्षद पूनम बरनवाल की पहल पर गिरिडीह में महाराजा अहिबरण के नाम हुआ एक चौराहा”

जन्मदिन का उपहार

युवा कहानीकार – अनिकेत गुप्त

सुबह से घर में बहस चल रही है। मैंने भी ठान लिया था कि इस बार मुझे अपनी कोई राय नहीं देनी है। पापा का कहना है कि दान हमलोग गौशाला में ही करेंगे जबकि मम्मी मंदिर के लिए कह रही है। पिछले 10 साल से हमारे घर का नियम-सा बन गया था। मेरे जन्मदिन पर हम पार्टी न करके हम उन रुपए को किसी धर्मस्थल पर दान कर देते थे। यह सिलसिला काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दो दिन बाद ही मेरा जन्मदिन आ रहा है। इस बार भी हर बार की तरह हमें रुपए को दान में देना है। यूं तो हर साल हम मंदिर में ही चढ़ावा चढ़ाते थे, पर पता नहीं क्यूं पापा गौशाला की जिद पकड़े हुए हैं। Continue reading “जन्मदिन का उपहार”