#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late

सोशल मीडिया से शुरू हुआ #MeToo अभियान भारत में भी जोर पकड़ रहा है। लोग धीरे-धीरे अपनी बात, आप बीती अलग-अलग तरीके से बता रहे हैं। ये मी-टू का अभियान अपने साथ हुए ‘ज्यादती’ को लेकर चुप्पी तोड़ने का साहस दे रहा है। #MeToo अभियान जब भारत में शुरू नहीं हुआ था, लोग चुप्पी तोड़ भी सकते हैं, ऐसा सोचना भी दुश्कर था। उस समय में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली प्रियंका बरनवाल ने एक बेहतरीन रचना के माध्यम से दुनिया से कहा It’s Never to Late. लेखिका प्रिंयका ने डेब्यू उपन्यास का यही शीर्षक दिया। यह लेखिका का भावनात्मक रूप से एक विराट अंदाज है, जो दुनिया को चुप्पी तोड़ने के लिए संबल प्रदान करता है कि चुप्पी तोड़ने के लिए देरी नहीं हुई ….।  Continue reading “#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late”

प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक

  • समीक्षा – दीपक राजा

प्राचीन भारत का इतिहास पुस्तक में कुल सात अध्याय दिए गए हैं जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर गुप्त काल के कालखंड के बाद तक की जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में तथ्यों को बिन्दुवार दिया गया है ताकि इसे याद रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक अध्याय के अंत में अध्याय से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को  Continue reading “प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक”

#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’

समीक्षक – दीपक राजा

स्त्री विमर्श के नाम पर बहुत-सी पुस्तकें, लेख, कहानी और कविताओं को मैंने समझने का प्रयास किया लेकिन ‘ताल ठोक के’ पुस्तक अपने शीर्षक के अनुसार ही डंके की चोट पर औरत की वास्तविक स्थिति से रू-ब-रू कराती है। पुस्तक की कविताएं एक ऐसे अहसास से परिचय कराती है जिससे हम रोजाना अपनी जिंदगी में दो-चार होते हैं। Continue reading “#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’”

स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक

समीक्षक – दीपक राजा

इलाहाबाद में लोकप्रिय प्रकाशन है ज्ञान सदन पब्लिकेशन। इस पब्लिकेशन ने ‘औपचारिक पत्र लेखन के विविध रूप’ के नाम से एक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक के लेखक श्री मुकेश बरनवाल हैं। बाबा बैद्यनाथ की नगरी में पले-बढ़े श्री बरनवाल ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् हैं और प्रशासनिक सेवा में जाने की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बेहतरीन प्रदर्शक हैं।  Continue reading “स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक”

इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन

दिल्ली के कटवरियासराय स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के सभागार में 11 अगस्त, 2018 को श्री मुकेश बरनवाल द्वारा भारतीय इतिहास पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन का हुआ। पुस्तकों का नाम ‘पाषाण काल से आजादी तक’ और ‘भारत का राष्ट्रीय आंदोलन’ है। दो पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम संवर्धन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हुआ। पुस्तकों का विमोचन दिल्ली विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों से आए प्रोफेसर और विद्वजनों के हाथों संपन्न हुआ।  Continue reading “इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन”

गजल – अफसानों की उल्फत

जमीं पर पैर नहीं या पैरों तले जमीं नहीं।
वो आसमां में उड़े तो इसका ख्याल नहीं।।

टूटते दरख्तों की जानिब किया जो खबर।
उस बेखबर बेवफा को इसका मलाल नहीं।।

गुलजार है उनका अफसानों की उल्फत।
ऐसे में गुजारे उम्र होंगे ऐसे हलाल नहीं।।

लूटा दूंगा बज्म-ए-दिल शाम-ए-महफिल।
सहन कर सकते हैं बांके का जलाल नहीं।।

– दीपक राजा
15 जुलाई, 2018
नई दिल्ली

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अगर आप रिश्तों के प्रति संजीदा हैं और रचनाएं करते हैं तो आप हो सकते हैं पुस्तक प्रकाशन योजना में शामिल

अगर आप खून के रिश्ते, पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक रिश्ते को लेकर संजीदा हैं और रिश्तों पर आधारित अपनी भावनाओं को शब्द में पिरोना जानते हैं तो यह खबर आपके लिए है। आप कविता, कहानी या किसी भी विधा में साहित्यिक रचना करते हैं तो यह खबर आपको पुस्तक का हिस्सा बनने का एक अवसर बनकर आया है। Diparti Welfare Foundation (DWF) आपके लिए पुस्तक प्रकाशन की योजना लेकर आया है। DWF की योजना में आप अपनी रचना भेजकर प्रकाशित होने वाली पुस्तक का हिस्सा बना सकते हैं।

पुस्तक प्रकाशन की योजना के तहत रचनाएं आमंत्रित
अखिल भारतीय स्तर पर काम करने की इच्छा रखने वाला संगठन – Diparti Welfare Foundation (DWF), पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को संजोना चाहता है। उन रिश्तों की भावनाओं और संवेदनाओं को एक आकार देना चाहता है। रिश्तों पर लिखी जा रही रचनाओं को एक सूत्र में पिरोना चाहता है। इसके लिए DWF पुस्तक प्रकाशन की योजना लेकर आपके बीच आया है।

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