बिकी हुई एक कलम


दामिनी

बिकी हुई कलम के दाम बहुत होते हैं
पर बिकी हुई कलम के काम भी बहुत होते हैं
बिकी हुई कलम को कीचड़ को कमल कहना पड़ता है
बिकी हुई कलम को क़ातिल को सनम कहना पड़ता है
बिकी हुई कलम को मौक़े पर ख़ामोश रहना होता है
और बेमौक़े ‘सरकार की जय’ कहना होता है
बिकी हुई कलम एक खूंटे से बंधी होती है
बिकी हुई कलम की सियाही जमी होती है
बिकी हुई कलम रोती नहीं, सिर्फ़ गाती है
बिकी हुई कलम से सच की आवाज़ नहीं आती है
बिकी हुई कलम शाहों के तख़्त नहीं हिला पाती है
बिकी हुई कलम सिर्फ़ चरण-पादुका बन जाती है
बिकी हुई कलम से आंधियां नहीं उठती हैं
बिकी हुई कलम से सिर्फ़ लार टपकती है
बिकी हुई कलम एक वेश्या होती है
जो अनचाहे जिस्मों को हंसके अपने जिस्म पे सहती है
बिकी हुई कलम की कोख बंजर होती है
बिकी हुई कलम अपनों ही की पीठ में घुसाया हुआ ख़ंजर होती है
बिकी हुई कलम से लिखा इतिहास सिर्फ़ कालिख पुता कागज़-भर होता है
बिकी हुई कलम का कांधा सिर्फ़ अपने शब्दों का जनाज़ा ढोता है
बिकी हुई कलम और जो चाहे बन जाती है
पर बिकी हुई कलम, कलम का हद अदा नहीं कर पाती है,
बिकी हुई कलम सिर्फ़ कलम नहीं रह पाती है…

‘मोदी मंत्र’, ‘मोदी सूत्र’ के बाद बाजार में आई ‘मोदी नीति’

भारतेंदु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ. हरीश चन्द्र बर्णवाल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर एक नई पुस्तक ‘मोदी नीति’ प्रकाशित हुई है। प्रधानमंत्री मोदी पर यह उनकी तीसरी पुस्तक है, जिसे प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले आई यह पुस्तक बताती है कि मोदी सरकार के पांच वर्षों की कार्यशैली से इस देश की सभ्यता, संस्कृति और समाज पर कितना गहरा और व्यापक असर पड़ा है, इसके दूरगामी प्रभाव क्या होंगे।

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#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late

सोशल मीडिया से शुरू हुआ #MeToo अभियान भारत में भी जोर पकड़ रहा है। लोग धीरे-धीरे अपनी बात, आप बीती अलग-अलग तरीके से बता रहे हैं। ये मी-टू का अभियान अपने साथ हुए ‘ज्यादती’ को लेकर चुप्पी तोड़ने का साहस दे रहा है। #MeToo अभियान जब भारत में शुरू नहीं हुआ था, लोग चुप्पी तोड़ भी सकते हैं, ऐसा सोचना भी दुश्कर था। उस समय में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली प्रियंका बरनवाल ने एक बेहतरीन रचना के माध्यम से दुनिया से कहा It’s Never to Late. लेखिका प्रिंयका ने डेब्यू उपन्यास का यही शीर्षक दिया। यह लेखिका का भावनात्मक रूप से एक विराट अंदाज है, जो दुनिया को चुप्पी तोड़ने के लिए संबल प्रदान करता है कि चुप्पी तोड़ने के लिए देरी नहीं हुई ….।  Continue reading “#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late”

प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक

  • समीक्षा – दीपक राजा

प्राचीन भारत का इतिहास पुस्तक में कुल सात अध्याय दिए गए हैं जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर गुप्त काल के कालखंड के बाद तक की जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में तथ्यों को बिन्दुवार दिया गया है ताकि इसे याद रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक अध्याय के अंत में अध्याय से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को  Continue reading “प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक”

#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’

समीक्षक – दीपक राजा

स्त्री विमर्श के नाम पर बहुत-सी पुस्तकें, लेख, कहानी और कविताओं को मैंने समझने का प्रयास किया लेकिन ‘ताल ठोक के’ पुस्तक अपने शीर्षक के अनुसार ही डंके की चोट पर औरत की वास्तविक स्थिति से रू-ब-रू कराती है। पुस्तक की कविताएं एक ऐसे अहसास से परिचय कराती है जिससे हम रोजाना अपनी जिंदगी में दो-चार होते हैं। Continue reading “#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’”

स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक

समीक्षक – दीपक राजा

इलाहाबाद में लोकप्रिय प्रकाशन है ज्ञान सदन पब्लिकेशन। इस पब्लिकेशन ने ‘औपचारिक पत्र लेखन के विविध रूप’ के नाम से एक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक के लेखक श्री मुकेश बरनवाल हैं। बाबा बैद्यनाथ की नगरी में पले-बढ़े श्री बरनवाल ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् हैं और प्रशासनिक सेवा में जाने की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बेहतरीन प्रदर्शक हैं।  Continue reading “स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक”

इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन

दिल्ली के कटवरियासराय स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के सभागार में 11 अगस्त, 2018 को श्री मुकेश बरनवाल द्वारा भारतीय इतिहास पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन का हुआ। पुस्तकों का नाम ‘पाषाण काल से आजादी तक’ और ‘भारत का राष्ट्रीय आंदोलन’ है। दो पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम संवर्धन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हुआ। पुस्तकों का विमोचन दिल्ली विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों से आए प्रोफेसर और विद्वजनों के हाथों संपन्न हुआ।  Continue reading “इतिहास पर मुकेश बरनवाल की दो पुस्तकों का विमोचन”