जन्मदिन का उपहार

युवा कहानीकार – अनिकेत गुप्त

सुबह से घर में बहस चल रही है। मैंने भी ठान लिया था कि इस बार मुझे अपनी कोई राय नहीं देनी है। पापा का कहना है कि दान हमलोग गौशाला में ही करेंगे जबकि मम्मी मंदिर के लिए कह रही है। पिछले 10 साल से हमारे घर का नियम-सा बन गया था। मेरे जन्मदिन पर हम पार्टी न करके हम उन रुपए को किसी धर्मस्थल पर दान कर देते थे। यह सिलसिला काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दो दिन बाद ही मेरा जन्मदिन आ रहा है। इस बार भी हर बार की तरह हमें रुपए को दान में देना है। यूं तो हर साल हम मंदिर में ही चढ़ावा चढ़ाते थे, पर पता नहीं क्यूं पापा गौशाला की जिद पकड़े हुए हैं। Continue reading “जन्मदिन का उपहार”

आसान नहीं है बदलाव

प्रियंका बरनवाल, लेखिका

समाज में अगर किसी तरह के सुधार की जरूरत है तो बदलाव करना ही पड़ता है। बदलाव ही ऐसी वो चाबी है जो गहरे से गहरे जड़ों में दबी छोटी से छोटी मानसिकता को भी बदल सकती है। बदलाव के माध्यम से शिकायतों को भी दूर कर किया जा सकता है। मगर क्या बदलाव आसान है? नहीं। आसान होता तो आज शायद मैं और आप इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं कर रहे होते। तो चलिए जानते हैं क्यों मुश्किल है बदलाव? Continue reading “आसान नहीं है बदलाव”

दिसंबर-जनवरी के हस्तांतरण काल में ये कैसा नव वर्ष

कुछ मित्र अभी से नव वर्ष की अग्रिम शुभकामना देने की प्रक्रिया में तल्लीन हो गये हैं। ऐसे में, हमें राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ” दिनकर ” की कविता याद आती है। वह कविता शब्दश: यहां Continue reading “दिसंबर-जनवरी के हस्तांतरण काल में ये कैसा नव वर्ष”

जीवन में बदलाव के लिए ‘मोदी सूत्र’ पढ़ना जरूरी

देश और दुनिया के सामने प्रधानमंत्री मोदी एक वैश्विक राजनेता बनकर सामने आए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार मोदी का विरोध हो रहा है। इसके बाद भी, हर बार नरेंद्र मोदी नई शक्ति और ऊर्जा के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत हुए हैं। हर बार विरोधियों की चाल उल्टी पड़ती गई। ऐसे शख्स के बारे में हर कोई जानना चाहता है। मोदी पर अब तक तीन सौ के करीब किताबें आई है। उसमें एक नाम और जुड़ गया ‘मोदी सूत्र’। Continue reading “जीवन में बदलाव के लिए ‘मोदी सूत्र’ पढ़ना जरूरी”