मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो निरंजन जैसे बच्चों की कमी नहीं

बरनवाल समाज में मेधावी बच्चों की कमी नहीं है। उन्हें सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो निरंजन बनने में देर नहीं लगती। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं। आप स्वयं पढ़िए… यूपीएससी 2016 में सफलता प्राप्त करने वाले निरंजन की जीवनी, जो मुझे इंटरनेट पर सर्च करने पर उपलब्ध हो पाया।

निरंजन बरनवाल, आईएएस 2016

राजधानी पटना से करीब 150 किमी दूर नवादा जिले के एक छोटे से गांव में मामूली खैनी का दुकान चलाने वाले का बेटा निरंजन सिविल सेवा 2016 में सफल हुआ। निरंजन की सफलता कई मायने में थोड़ी अलग है।

बचपन में निरंजन भी अपने पिता की खैनी (तम्बाकू) की दुकान पर बैठकर उनकी मदद करता था। पर पढ़ने की जीवट इच्छा ही थी कि आगे बढ़ता गया। कम्पीटिशन से इसने जवाहर नवोदय विद्यालय में नामांकन के लिए सफलता प्राप्त की, नवोदय चुनने का कारण सिर्फ यही था कि यहां शिक्षा मुफ्त थी।

दसवीं की शिक्षा के बाद पटना साइंस कॉलेज पहुंच तो गया पर वहां का खर्च निकाल पाना इसके परिवार के बस में नहीं था। आसरा इसे अपने गांव के एक चाचा के यहां मिला और करीब 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर कॉलेज जाता, उसके बाद फीस, किताब, पेंसिल आदि के लिए बच्चों को पैदल घर-घर जाकर ट्यूशन देना शुरू किया। फिर कुछ दिनों बाद 600 रुपये में सेंकेड हैंड साइकिल खरीदी।

किस्मत का दरवाजा खुला, आईआईटी में सेलेक्शन हुआ और फिर निरंजन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज सिविल सेवा में सफलता से इसने पिता के सपने को साकार कर दिया है। ये बिहार इस निरंजन का है। इसके पिता आज अपने बेटे की सफलता पर कहते फिर रहे हैं कि ‘साहब हो गवा हमार बिटवा।’

One thought on “मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो निरंजन जैसे बच्चों की कमी नहीं”

  1. मेहनत कभी बेकार नही जाती जो मेहनत करते है उनकी कभी हार नही होती

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