100 फीसदी विकलांग, फिर भी मेहनत करके बच्चों की करते हैं परवरिश

हममें से किसी को थोड़ा भी कष्ट होता है तो हम सबको लगने लगता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा हमें ही दुख है। लेकिन आइए हम आपको एक ऐसे शख्सियत से मिलवाते हैं जिसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। पत्नी का देहांत हो चुका है। दायां पैर घुटने से उपर तक हादसे में गंवा चुके हैं। एक बीमारी की वजह से दायां हाथ भी कटवा दिया। इसके बाद भी उनका जज्बा कम नहीं है। घर में खाना बनाने से भोजन के लिए पैसे का इंतजाम भी खुद ही करते हैं। मेहनत-मजदूरी करते हैं, भीख नहीं मांगते। सम्मान से जीते हैं। ये हमारे लिए प्रेरणा हैं। आइए इनसे प्रेरणा लें, अपने दुख और असुविधा को नजरअंदाज करें और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जुटें।

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