मोम का पुतला देखने के लिए लंदन जाने की जरूरत नहीं, खुल गया दिल्ली का मैडम तुसाद म्युजियम

दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध मैडम तुसाद का म्यूजियम दिल्ली में आम लोगों के लिए एक दिसंबर से खुल गया है। यह म्यूजियम सप्ताह के सातो दिन खुला रहेगा। इस म्युजियम में विश्व के प्रसिद्ध 51 शख़्सियतों के मोम के पुतले हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल, अभिनेत्री मधुबाला, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, कपिलदेव, ब्रायन लारा, धावक मिलखा सिंह, बॉक्सर मैरी कॉम डांसर माइकल जैक्सन प्रमुख हैं। म्युजियम के टिकट की कीमत वयस्कों के लिए 960 और बच्चों के लिए 760 रखी गई है। 11 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी वयस्क व्यक्ति का होना जरूरी है।

पूरे विश्व में मैडम तुसाद संग्रहालय 23 जगहों पर है। भारत में पहला और विश्व का 23वां संग्रहालय दिल्ली में खुला है। यह दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में है। यहां की ऐतिहासिक रीगल इमारत में मैडम तुसाद का संग्रहालय है। मरलिन एंटरटेनमेंट्स इंडिया के डायरेक्टर अंशुल जैन ने कहा, हम इस संग्रहालय के लिए बहुत ही रोमांचित है।

मोम के पुतलों के नई दिल्ली संग्रहालय को सात खंडों में विभाजित किया गया है। इसमें इतिहास, खेल, संगीत, फिल्म और राजनीतिक जगत की मशहूर 51 हस्तियों के मोम से बने पुतलों को रखा गया है। फिल्म जगत से सलमान खान, टॉम क्रूज, राज कपूर, रणबीर कपूर आदि के मोम से बने पुतले हैं। मैडम तुसाद के प्रवक्ता ने बताया कि राज कपूर का मोम का पुतला अकेला ऐसा पुतला है जो श्वेत श्याम है।

एक खंड आगंतुकों को मैडम तुसाद का इतिहास बताएगा जिसमें बताया जाएगा कि कैसे मोम का पुतला कैसे बनता है। इस खंड में ही 20 मिनट की एक फिल्म दिखाई जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना मोम का पुतला बनाए जाने के अनुभवों को बताते हैं। खेल खंड में, मेरी कॉम, डेविड बेकहम, मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ट के साथ ही भारतीय क्रिकेटर कपिल देव और सचिन तेंदुलकर भी हैं। इतिहास के खंड में महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, एपीजे अब्दुल कलाम और मोदी के मोम के पुतले हैं।

मैडम तुसाद म्युजियम का इतिहास
पूरे विश्व में जहां भी मैडम तुसाद म्युजियम है, उसका मालिकाना हक मरलिन एंटरटेनमेंट्स के पास है। मैडम तुसाद के पहले संग्रहालय की स्थापना 1835 में लंदन की बेकर स्ट्रीट में हुई थी। वहां पर 200 साल से ज्यादा वक्त से संग्रहालय चल रहा है और आज विश्व में 23 प्रमुख स्थलों पर यह संग्रहालय है। इसमें लंदन, शंघाई, हांगकांग, बर्लिन और अब नई दिल्ली भी शामिल है।

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