होटल सहारा स्टार के आईटी हेड बने कृष्ण बरनवाल

सहारा इंडिया परिवार की सहयोगी कंपनी है होटल सहारा स्टार। यह मुंबई का 5 स्टार होटल है जो मुंबई में प्रादेशिक हवाई अड्डा के पास है। होटल सहारा स्टार कंपनी ने श्री कृष्ण बरनवाल को अपना नया आईटी हेड नियुक्त किया है। Continue reading “होटल सहारा स्टार के आईटी हेड बने कृष्ण बरनवाल”

उम्मीद का दीया

नोट – वाट्सअप से स्टोरी मिली। अच्छी है। इसके जो भी रचनाकार हैं, उनको साधुवाद। प्रेरक लिखने वाले का कोई नाम बता सकें तो उन्हें इस कहानी के लिए क्रेडिट जरूर देंगे। – संपादक

एक घर मे पांच दिए जल रहे थे। Continue reading “उम्मीद का दीया”

बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली के महासचिव बने मुन्नी लाल, विरेन्द्र को मिली कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी

वर्ष 2017-19 के लिए बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली की नई कार्यकारिणी गठन हो गया है। सभा के सक्रिय कार्यकर्ताओं की सर्व सहमति से प्रताप विहार, गाजियाबाद के रहने वाले श्री मुन्नी लाल जी को बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली का महासचिव बनाया गया है जबकि मंडावली, पूर्वी दिल्ली के श्री विरेन्द्र कुमार बरनवाल सभा का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। Continue reading “बरनवाल वैश्य सभा, दिल्ली के महासचिव बने मुन्नी लाल, विरेन्द्र को मिली कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी”

पार्षद पूनम बरनवाल की पहल पर गिरिडीह में महाराजा अहिबरण के नाम हुआ एक चौराहा

झारखंड के गिरिडीह शहर से एक सुखद समाचार मिला। यहां के एक चौराहे का नामकरण बरनवाल समाज के जातिपुरुष महाराजा अहिबरण के नाम पर हुआ। यह पूरे भारत वर्ष में रहने वाले बरनवाल समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण है, वह इसलिए कि Continue reading “पार्षद पूनम बरनवाल की पहल पर गिरिडीह में महाराजा अहिबरण के नाम हुआ एक चौराहा”

जन्मदिन का उपहार

युवा कहानीकार – अनिकेत गुप्त

सुबह से घर में बहस चल रही है। मैंने भी ठान लिया था कि इस बार मुझे अपनी कोई राय नहीं देनी है। पापा का कहना है कि दान हमलोग गौशाला में ही करेंगे जबकि मम्मी मंदिर के लिए कह रही है। पिछले 10 साल से हमारे घर का नियम-सा बन गया था। मेरे जन्मदिन पर हम पार्टी न करके हम उन रुपए को किसी धर्मस्थल पर दान कर देते थे। यह सिलसिला काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दो दिन बाद ही मेरा जन्मदिन आ रहा है। इस बार भी हर बार की तरह हमें रुपए को दान में देना है। यूं तो हर साल हम मंदिर में ही चढ़ावा चढ़ाते थे, पर पता नहीं क्यूं पापा गौशाला की जिद पकड़े हुए हैं। Continue reading “जन्मदिन का उपहार”

बरन पुंज के जनवरी-जून 2018 का अंक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

बरन पुंज पत्रिका का नया अंक (जनवरी-जून2018) पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें। यहां पीडीएफ फाइल है। उसे डाउनलोड करें और पढ़े। इसमें मां पर कविता है तो चित्रकार के नाम से एक प्रेरक प्रसंग है। वहीं युवा कहानीकार सुरेश बरनवाल की कहानी सैनिक और बंदूक भी है जिसे वर्ष का सबसे बेहतरीन कहानी चुुना गया था।

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आपको पत्रिका अच्छी लगे और इसका प्रिंट कॉपी नियमित रूप से अपने पास मंगवाना चाहते हैं तो Continue reading “बरन पुंज के जनवरी-जून 2018 का अंक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें”

आसान नहीं है बदलाव

प्रियंका बरनवाल, लेखिका

समाज में अगर किसी तरह के सुधार की जरूरत है तो बदलाव करना ही पड़ता है। बदलाव ही ऐसी वो चाबी है जो गहरे से गहरे जड़ों में दबी छोटी से छोटी मानसिकता को भी बदल सकती है। बदलाव के माध्यम से शिकायतों को भी दूर कर किया जा सकता है। मगर क्या बदलाव आसान है? नहीं। आसान होता तो आज शायद मैं और आप इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं कर रहे होते। तो चलिए जानते हैं क्यों मुश्किल है बदलाव? Continue reading “आसान नहीं है बदलाव”