प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक

  • समीक्षा – दीपक राजा

प्राचीन भारत का इतिहास पुस्तक में कुल सात अध्याय दिए गए हैं जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर गुप्त काल के कालखंड के बाद तक की जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में तथ्यों को बिन्दुवार दिया गया है ताकि इसे याद रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक अध्याय के अंत में अध्याय से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को  संकलित किया गया है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण प्रश्नों का एक सेट भी तैयार किया गया है। बिल्कुल वैसा ही जैसा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों की तैयारी कम समय में हो और सुगमता से हो, इसको ध्यान में रखते हुए इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

हिन्दी भाषा माध्यम से एसएससी से लेकर यूपीएससी तक, बैंक से लेकर रेलवे तक तमाम प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह पुस्तक बहुत ही कारगर साबित होने वाला है। पुस्तक के लेखक श्री मुकेश बरनवाल ने अपने अध्ययन और अध्यापन के अनुभव को बखूबी इस्तेमाल किया है। प्रतियोगियों को ध्यान में रखते हुए लेखक ने औपचारिक पत्र लेखन के विविध रूप समेत कई पुस्तकों को लिखा है। पुस्तक को प्रकाशित करके ज्ञान सदन पब्लिकेशन ने नेक काम किया है। कम कीमत में ज्यादा सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पब्लिशसर बधाई का पात्र है।

पुस्तक – प्राचीन भारत का इतिहास
प्रकाशक – ज्ञान सदन पब्लिकेशन, इलाहाबाद
कीमत – मुकेश बरनवाल
मूल्य – एक सौ बीस रुपए मात्र

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