सामाजिक सेवा करने के लिए बैनर की जरूरत नहीं, इसका उदाहरण हैं सचिन

कोई समाज सेवा करने की इच्छा रखता है तो इसके लिए किसी बैनर की जरूरत नहीं होती, समूह की जरूरत नहीं होती, पैसे की जरूरत नहीं होती। समाज सेवा करने के लिए आपके पास सिर्फ और सिर्फ दो चीज आपके पास होनी चाहिए। पहली चीज – काम करने की इच्छा और दूसरी चीज – काम करने में लगने वाला समय। ऐसे ही एक समाजसेवी के रूप में दिल्ली-एनसीआर में काम कर रहे हैं सचिन शर्मा।

सचिन शर्मा पेशे से ऑटो चालक है। यही उनके और उनके परिवार के भरण-पोषण का जरिया है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन अभियान से प्रेरणा लेकर अपने ऑटो रिक्शा में पीछे एक डस्टबीन के लिए कन्टेनर बांध रखा है। कहते हैं कि मैं सड़क पर कचरा नहीं फेंकूंगा और न ही अपने सवारी को अपने ऑटो रिक्शा से सड़क पर कचरा फेंकने दूंगा। मैं सड़क को साफ नहीं कर सकता तो कम से कम सड़क को गंदा तो न करूं। सचिन इस तरह से सड़क गंदा करने वालों के साथ ‘असहयोग अभियान’ चला रहे हैं और ‘न्यू इंडिया’ के लिए स्वच्छता के सिपाही के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं।

ऑटो रिक्शा पर सचिन शर्मा ने एक लाइन लिखवा रखी है कि रात 12 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक हमारी सेवा फ्री है। यह लाइन सचिन शर्मा के अमीर दिल का परिचय देता है। वह कहते हैं कि ईश्वर की कृपा जरूरत के हिसाब से परिवार के भरण-पोषण के लायक आमदनी हो जाती है। कुछ समय अगर मैं ईश्वर के बनाए नेक बंदों के लिए बिना पैसे लिए काम करता हूं तो भी मेरी आमदनी का हिसाब वो रखते हैं।

सचिन शर्मा के बारे में आप इस वीडियो रिपोर्ट को देखकर भी जान सकते हैं।

सचिन फर्रूखाबाद के रहने वाले हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पास टिगरी गांव में रहते हैं। दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में ऑटो चलाते हैं। उन्होंने अपने ऑटो में कहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लिखवा रखा है तो कहीं स्वच्छता को बढ़ावा देने की कुछ पंक्तियां है। सचिन शर्मा जैसे लोगों की वजह से समाज और दुनिया में लोग सद्भावना और विश्वास की डोर में बंधे हैं। सचिन शर्मा जैसे लोग जो वास्तव में सामाजिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। उनके जज्बे को प्रणाम।

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