प्यार

शायरी करने के लिए

जीवन तरंग में

मन मतंग सा

प्यार में

घुल जाना

आवश्यक है

नहीं तो

शायर तो

हो सकता है

दफ्तर का बाबू

कचहरी का दीवान

#दीपक_राजा

DWF के आह्वान पर मदद की धीमी रफ्तार, 40 लोगों ने बढ़ाए हाथ

दीपारती वेलफेयर फाउंडेशन (DWF) के आह्वान पर कई लोगों ने हाथ बढ़ाया, अब तक जो जानकारी प्राप्त हो पाई, उसके अनुसार 19-30 सितंबर, 2019 मुहिम के बीच कुल 41 लोगों ने मदद की है। 41 में से 9 लोगों ने सीधे विरेंद्र बरनवाल जी के खाते में पैसे जमा कराए हैं जबकि 32 लोगों ने DWF के बैंक खाते और पेटीएम नंबर के जरिए अब तक बीस हजार रुपए की मदद की है। जानकारी यह भी है कि इलाज के लिए विरेन्द्र जी ने जो संस्थागत रूप से ब्याज पर कर्ज उठाया, पालघर के बरनवाल बंधुओं और मुंबई के बरनवाल समाज के सहयोग से उस कर्ज का भुगतान करने का प्रयास हो रहा है।

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सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की पहली शर्त है 40 दिनों तक सतत पवित्र रहने की साधना

हिन्दू धर्म की आस्था पर चोट करने वाले गैंग को यह सतत साधना को नारी विरोधी दिया करार
हिन्दू धर्म को कमजोर करने वाले गैंग से प्रभावित है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
40 दिनों तक सतत पवित्र रहने की साधना में असफल रहने वालों के लिए मंदिर में प्रवेश वर्जित

  • दीपक राजा

केरल स्थित सबरीमाला मंदिर के कपाट पांच दिनों के लिए खुल गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर इन दिनों यहां महिलाओं के प्रवेश को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिन्हें मंदिर में, मंदिर के देवता में और मंदिर की व्यवस्था में आस्था नहीं है, वे भी मंदिर में प्रवेश करने के लिए व्याकुल हैं। मंदिर में प्रवेश करने की यह व्याकुलता सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं की आस्था और परंपरा पर चोट करना है। हिन्दुओं की आस्था और परंपरा पर चोट करना, इसे कमजोर करना और नष्ट करने वालों की एक चाल है सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बहाने सबरीमाला मंदिर की पवित्रता को आघात करना।  Continue reading “सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की पहली शर्त है 40 दिनों तक सतत पवित्र रहने की साधना”

प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक

  • समीक्षा – दीपक राजा

प्राचीन भारत का इतिहास पुस्तक में कुल सात अध्याय दिए गए हैं जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर गुप्त काल के कालखंड के बाद तक की जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में तथ्यों को बिन्दुवार दिया गया है ताकि इसे याद रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक अध्याय के अंत में अध्याय से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को  Continue reading “प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक”

#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’

समीक्षक – दीपक राजा

स्त्री विमर्श के नाम पर बहुत-सी पुस्तकें, लेख, कहानी और कविताओं को मैंने समझने का प्रयास किया लेकिन ‘ताल ठोक के’ पुस्तक अपने शीर्षक के अनुसार ही डंके की चोट पर औरत की वास्तविक स्थिति से रू-ब-रू कराती है। पुस्तक की कविताएं एक ऐसे अहसास से परिचय कराती है जिससे हम रोजाना अपनी जिंदगी में दो-चार होते हैं। Continue reading “#MeeToo के दौर में भोगे हुए यथार्थ की सच्चाई है ‘ताल ठोक के’”

स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक

समीक्षक – दीपक राजा

इलाहाबाद में लोकप्रिय प्रकाशन है ज्ञान सदन पब्लिकेशन। इस पब्लिकेशन ने ‘औपचारिक पत्र लेखन के विविध रूप’ के नाम से एक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक के लेखक श्री मुकेश बरनवाल हैं। बाबा बैद्यनाथ की नगरी में पले-बढ़े श्री बरनवाल ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् हैं और प्रशासनिक सेवा में जाने की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बेहतरीन प्रदर्शक हैं।  Continue reading “स्मार्ट फोन वालों के लिए भी उपयोगी है पुस्तक”

पांच लाख की आवश्यकता, समाज से अब तक मिला मात्र 80 हजार

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए श्री मनोज कुमार बरनवाल जी पारस अस्पताल पटना में 31अगस्त को भर्ती होंगे, 3 सितंबर को किडनी ट्रांसप्लांट होगा। उनकी पत्नी उन्हें किडनी दे रही है। कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बिहार सरकार 3 लाख रुपए की आर्थिक मदद कर रही है। श्री मनोज जी पिछले पांच साल से डायलिसिस पर हैं। उनकी आर्थिक हालात ठीक नहीं है। श्री मनोज जी के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक देखें Continue reading “पांच लाख की आवश्यकता, समाज से अब तक मिला मात्र 80 हजार”