#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late

सोशल मीडिया से शुरू हुआ #MeToo अभियान भारत में भी जोर पकड़ रहा है। लोग धीरे-धीरे अपनी बात, आप बीती अलग-अलग तरीके से बता रहे हैं। ये मी-टू का अभियान अपने साथ हुए ‘ज्यादती’ को लेकर चुप्पी तोड़ने का साहस दे रहा है। #MeToo अभियान जब भारत में शुरू नहीं हुआ था, लोग चुप्पी तोड़ भी सकते हैं, ऐसा सोचना भी दुश्कर था। उस समय में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली प्रियंका बरनवाल ने एक बेहतरीन रचना के माध्यम से दुनिया से कहा It’s Never to Late. लेखिका प्रिंयका ने डेब्यू उपन्यास का यही शीर्षक दिया। यह लेखिका का भावनात्मक रूप से एक विराट अंदाज है, जो दुनिया को चुप्पी तोड़ने के लिए संबल प्रदान करता है कि चुप्पी तोड़ने के लिए देरी नहीं हुई ….।  Continue reading “#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late”

आसान नहीं है बदलाव

प्रियंका बरनवाल, लेखिका

समाज में अगर किसी तरह के सुधार की जरूरत है तो बदलाव करना ही पड़ता है। बदलाव ही ऐसी वो चाबी है जो गहरे से गहरे जड़ों में दबी छोटी से छोटी मानसिकता को भी बदल सकती है। बदलाव के माध्यम से शिकायतों को भी दूर कर किया जा सकता है। मगर क्या बदलाव आसान है? नहीं। आसान होता तो आज शायद मैं और आप इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं कर रहे होते। तो चलिए जानते हैं क्यों मुश्किल है बदलाव? Continue reading “आसान नहीं है बदलाव”