बटुआ खोलें, कैंसर पीड़ित विरेंद्र को चाहिए समाज का सहारा

गाजीपुर (यूपी) के सैदपुर क्षेत्र के निवासी श्री विरेंद्र बरनवाल मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। वर्तमान में वह महाराष्ट्र के पालघर जिले में रहते हैं। टाटा अस्पताल, मुंबई में उनका उपचार चल रहा है। कैंसर के इलाज में विरेन्द्र का परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, उन्हें समाज से मदद की दरकार है। बीमारी के इलाज को एक सामूहिक यज्ञ मानते हुए कुछ मदद करने के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं। विरेंद्र के परिवार को देश और समाज से उम्मीद है कि उन्हें सब थोड़ी – थोड़ी मदद करें।

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दिल्ली बरनवाल समाज का तीसरा युवक-युवती परिचय सम्मेलन संपन्न

बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के तत्वावधान में तीसरा युवक-युवती परिचय सम्मेलन संपन्न हुआ। यह सम्मेलन जवाहर लाल नेहरू युवा केंद्र, दिल्ली के नारायण दत्त तिवारी भवन के चौथी मंजिल पर आयोजित हुआ। बरनवाल समाज के युवा सदस्यों को उन्हें जीवन साथी की तलाश को पूरी करने के लिए लगातार तीसरे वर्ष सभा ने इस सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में आने वाले 30 से अधिक युवक और युवतियों ने अपना-अपना परिचय दिया जबकि लगभग इतनी ही संख्या में युवक-युवतियों का बायो डाटा पढ़ा गया। इन सभी लोगों का डाटा आए हुए युवक-युवतियों के बीच शेयर किया गया। इसी माह आने वाले बरन पुंज अंक में सभी युवक-युवतियों का बायोडाटा का संक्षिप्त विवरण प्रकाशित किया जाएगा।

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दिल्ली होली मिलन में बच्चों का जलवा

बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली और युवा भारती ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में होली मंगल मिलन कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में हुआ। राष्ट्रीय बाल भवन के समीप चंद्रशेखर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। महाराजा अहिबरण जी की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। दीप प्रज्वलन के बाद सुश्री जिया बरनवाल ने सरस्वती वंदना पर अपनी प्रस्तुति देकर लोगों का मन मोह लिया। चाहे तो नीचे दिए वीडियो को आप भी क्लिक करके देख सकते हैं। सरस्वती वंदना के बाद एक के बाद एक सभी समाज के प्रबुद्ध लोगों का परिचय हुआ। नोएडा से जहां लोकप्रिय ज्योतिष और एस्ट्रोलजर शिव प्रसाद आनंद और सामाजिक कार्यकर्ता शैलेन्द्र बरनवाल आए तो पानीपत से होली मिलन में भाग लेने के लिए लोकेश बरनवाल जी सपरिवार यहां आए। समाज के कई गण्यमान्य लोगों ने अपने-अपने अनुभव सुनाए। पहली बार बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के कार्यक्रम में कविता पाठ का भी आनंद लिया गया। Continue reading “दिल्ली होली मिलन में बच्चों का जलवा”

दिल्ली के बरनवाल समाज ने की सामूहिक आरती

अहिबरण जयंती के मौके पर मंचासीन विख्यात पत्रकार जयशंकर गुप्त, पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती, बरनवाल वैश्य सभा के अध्यक्ष एनके बरनवाल व अन्य। फोटो : आरती बरनवाल

दिल्ली में 25 दिसंबर 2018 को आईटीओ के पास राजाराम मोहन राय मेमोरियल हॉल में महाराजा अहिबरण जी की जयंती मनाई गई। बरनवाल वैश्य सभा दिल्ली के बैनर तले दिल्ली एनसीआर के बरनवाल बंधुओं ने महाराजा अहिबरण जी की सामूहिक आरती की है। सामूहिक आरती गान का वीडियो देखकर अंचभित रह जाएंगे आप …

बरन पुंज पत्रिका में भागीदारी करने का मौका, आवेदन करें

अगर आप लेखन, संपादन में रूचि रखते हैं तो आपके लिए एक अच्छी सूचना है। दिल्ली से प्रकाशित होने वाली बरन पुंज पत्रिका में सक्रिय भागीदारी निभाने का मौका आपके हाथ आया है। बरन पुंज पत्रिका के लिए संपादक मंडल और प्रतिनिधि मंडल को पुनर्गठित किया जा रहा है।  Continue reading “बरन पुंज पत्रिका में भागीदारी करने का मौका, आवेदन करें”

#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late

सोशल मीडिया से शुरू हुआ #MeToo अभियान भारत में भी जोर पकड़ रहा है। लोग धीरे-धीरे अपनी बात, आप बीती अलग-अलग तरीके से बता रहे हैं। ये मी-टू का अभियान अपने साथ हुए ‘ज्यादती’ को लेकर चुप्पी तोड़ने का साहस दे रहा है। #MeToo अभियान जब भारत में शुरू नहीं हुआ था, लोग चुप्पी तोड़ भी सकते हैं, ऐसा सोचना भी दुश्कर था। उस समय में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली प्रियंका बरनवाल ने एक बेहतरीन रचना के माध्यम से दुनिया से कहा It’s Never to Late. लेखिका प्रिंयका ने डेब्यू उपन्यास का यही शीर्षक दिया। यह लेखिका का भावनात्मक रूप से एक विराट अंदाज है, जो दुनिया को चुप्पी तोड़ने के लिए संबल प्रदान करता है कि चुप्पी तोड़ने के लिए देरी नहीं हुई ….।  Continue reading “#MeToo अभियान की आवाज को संबल देता है It’s Never to Late”

प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक

  • समीक्षा – दीपक राजा

प्राचीन भारत का इतिहास पुस्तक में कुल सात अध्याय दिए गए हैं जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर गुप्त काल के कालखंड के बाद तक की जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में तथ्यों को बिन्दुवार दिया गया है ताकि इसे याद रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक अध्याय के अंत में अध्याय से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को  Continue reading “प्राचीन भारत को अंगुलियों पर याद रखने के लिए पढ़ना चाहिए ये पुस्तक”